• Sad Shayari

    शायद कोई तो कर

    शायद कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी
    तब ही तो मेरी याद तुम्हे अब नहीं आती

    सोचा था आज तेरे सिवा

    सोचा था आज तेरे सिवा कुछ और सोचुँ !
    अभी तक इस सोच में हुँ कि और क्या सोचुँ !!

    माना मौसम भी बदलते है

    माना मौसम भी बदलते है मगर धीरे – धीरे ….
    तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है …

    अब न करूंगा अपने दर्द

    अब न करूंगा अपने दर्द को बयाँ
    जब दर्द सहना मुझको ही है
    तो तमाशा क्यों करना

    दिन हुआ है, तो रात भी

    दिन हुआ है, तो रात भी होगी,
    मत हो उदास, उससे कभी बात भी होगी।
    वो प्यार है ही इतना प्यारा,
    ज़िंदगी रही तो मुलाकात भी होगी।

    मेरे सब्र की इन्तेहाँ क्या पूछते हो

    मेरे सब्र की इन्तेहाँ क्या पूछते हो ‘फ़राज़’
    वो मेरे सामने रो रहा है किसी और के लिए।

    समुन्द्र दे किनारे घर नहीं हुँदै

    समुन्द्र दे किनारे घर नहीं हुँदै
    गमा बीच डूब के गुजरे नहीं हुंदे
    सुख दुःख दा साथ दिन रात दा
    हर पल मौजां दे हुलारे नहीं हुंदे

    कोई रात से कह दो कि थम जाये

    कोई रात से कह दो कि थम जाये
    मैं आज ख्वाब में ज़िन्दगी जीने वाला हूँ


    अब जानेमन तू तो नहीं

    अब जानेमन तू तो नहीं,
    शिकवा-ए-गम किस से कहें
    या चुप हें या रो पड़ें,
    किस्सा-ए-गम किससे कहें।

    आईना देखोगे तो मेरी याद आएगी

    आईना देखोगे तो मेरी याद आएगी
    साथ गुज़री वो मुलाकात याद आएगी
    पल भर क लिए वक़्त ठहर जाएगा,
    जब आपको मेरी कोई बात याद आएगी