• Dard Shayari

    शायद कोई तो कर

    शायद कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी
    तब ही तो मेरी याद तुम्हे अब नहीं आती

    अल्फाज़ तो बहुत है

    अल्फाज़ तो बहुत है मोहब्बत को जताने के लिए !
    जो मेरी खामुशी नहीं समझ सका
    वो मेरी मोहब्बत क्या समझे गा !!

    अनजान थे हम अनजान

    अनजान थे हम अनजान ही रहने दो,
    किसी की यादों में हमें पल पल यूँ ही मरने दो,
    क्यों करते हो बदनाम लेकर नाम हमारा,
    अब तो इस नाम को गुमनाम रहने दो।

    सोचा था आज तेरे सिवा

    सोचा था आज तेरे सिवा कुछ और सोचुँ !
    अभी तक इस सोच में हुँ कि और क्या सोचुँ !!

    माना मौसम भी बदलते है

    माना मौसम भी बदलते है मगर धीरे – धीरे ….
    तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है …

    अब न करूंगा अपने दर्द

    अब न करूंगा अपने दर्द को बयाँ
    जब दर्द सहना मुझको ही है
    तो तमाशा क्यों करना

    कौन कहता है नफ़रतों में

    कौन कहता है नफ़रतों में दर्द है मोहसिन,
    कुछ मोहब्बतें भी बड़ी दर्द नाक होती है।

    कोई रात से कह दो कि थम जाये

    कोई रात से कह दो कि थम जाये
    मैं आज ख्वाब में ज़िन्दगी जीने वाला हूँ


    किस मुँह से इलज़ाम लगाए

    किस मुँह से इलज़ाम लगाए
    बारिश कि बौछारों पर
    हमने खुद तस्वीर बनायीं थी
    मिटटी कि दीवारों पर

    अब जानेमन तू तो नहीं

    अब जानेमन तू तो नहीं,
    शिकवा-ए-गम किस से कहें
    या चुप हें या रो पड़ें,
    किस्सा-ए-गम किससे कहें।