• Dard Bhari Shayari

    माना मौसम भी बदलते है

    माना मौसम भी बदलते है मगर धीरे – धीरे ….
    तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है …

    वो मिली भी तो क्या मिली

    वो मिली भी तो क्या मिली
    बन के बेवफा मिली,
    इतने तो मेरे गुनाह ना थे
    जितनी मुझे सजा मिली।

    वो कह कर गई थी

    वो कह कर गई थी कि लौटकर आऊँगी,
    मैं इंतजार ना करता तो क्या करता,
    वो झूठ भी बोल रही थी बड़े सलीके से,
    मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता।

    कौन कहता है नफ़रतों में

    कौन कहता है नफ़रतों में दर्द है मोहसिन,
    कुछ मोहब्बतें भी बड़ी दर्द नाक होती है।

    कोई रुठे आगर तो उसे फौरन मना लो

    कोई रुठे आगर तो उसे फौरन मना लो
    क्योंकि जिद की जंग मे आक्सर
    जुदाई जीत जाती है बाबु

    वफादार और तुम ?

    वफादार और तुम ?
    ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम?
    इल्जाम भी अच्छा है.

    मिल ही जाएगा कोई ना कोई

    मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला
    अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता

    कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी

    कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
    कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
    बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
    आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी

    नींद चुराने वाले पूछते हैं

    नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यों नही,
    इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यों नही

    “कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे

    “कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे
    हम तो दरिया है समंदर में उतर जायेंगे
    वो तरस जायेंगे प्यार की एक बून्द के लिए
    हम तो बादल है प्यार के किसी और पर बरस जायेंगे.”