• Sad Shayari

    शायद कोई तो कर

    शायद कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी
    तब ही तो मेरी याद तुम्हे अब नहीं आती

    अल्फाज़ तो बहुत है

    अल्फाज़ तो बहुत है मोहब्बत को जताने के लिए !
    जो मेरी खामुशी नहीं समझ सका
    वो मेरी मोहब्बत क्या समझे गा !!

    अनजान थे हम अनजान

    अनजान थे हम अनजान ही रहने दो,
    किसी की यादों में हमें पल पल यूँ ही मरने दो,
    क्यों करते हो बदनाम लेकर नाम हमारा,
    अब तो इस नाम को गुमनाम रहने दो।

    सोचा था आज तेरे सिवा

    सोचा था आज तेरे सिवा कुछ और सोचुँ !
    अभी तक इस सोच में हुँ कि और क्या सोचुँ !!

    माना मौसम भी बदलते है

    माना मौसम भी बदलते है मगर धीरे – धीरे ….
    तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है …

    अब न करूंगा अपने दर्द

    अब न करूंगा अपने दर्द को बयाँ
    जब दर्द सहना मुझको ही है
    तो तमाशा क्यों करना

    दिन हुआ है, तो रात भी

    दिन हुआ है, तो रात भी होगी,
    मत हो उदास, उससे कभी बात भी होगी।
    वो प्यार है ही इतना प्यारा,
    ज़िंदगी रही तो मुलाकात भी होगी।

    मेरे सब्र की इन्तेहाँ क्या पूछते हो

    मेरे सब्र की इन्तेहाँ क्या पूछते हो ‘फ़राज़’
    वो मेरे सामने रो रहा है किसी और के लिए।

    वो भी दिन थे जब हम भी पिया करते थे,

    वो भी दिन थे जब हम भी पिया करते थे,
    यूँ न करो हमसे पीने पिलाने की बात,
    जितनी तुम्हारे जाम में है शराब,
    उतनी हम पैमाने में छोड़ दिया करते थे।

    समुन्द्र दे किनारे घर नहीं हुँदै

    समुन्द्र दे किनारे घर नहीं हुँदै
    गमा बीच डूब के गुजरे नहीं हुंदे
    सुख दुःख दा साथ दिन रात दा
    हर पल मौजां दे हुलारे नहीं हुंदे