• कितना भी पकड़ो फिसलता

    कितना भी पकड़ो फिसलता जरूर है
    ये वक्त है साहब बदलता जरूर है

    इतने काबिल बनो कि तुम्हें
    अपने लिए नहीं तो उनके लिए
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