• Dard Shayari

    अल्फाज़ तो बहुत है

    अल्फाज़ तो बहुत है मोहब्बत को जताने के लिए !
    जो मेरी खामुशी नहीं समझ सका
    वो मेरी मोहब्बत क्या समझे गा !!

    सोचा था आज तेरे सिवा

    सोचा था आज तेरे सिवा कुछ और सोचुँ !
    अभी तक इस सोच में हुँ कि और क्या सोचुँ !!

    माना मौसम भी बदलते है

    माना मौसम भी बदलते है मगर धीरे – धीरे ….
    तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है …

    अब न करूंगा अपने दर्द

    अब न करूंगा अपने दर्द को बयाँ
    जब दर्द सहना मुझको ही है
    तो तमाशा क्यों करना

    वो मिली भी तो क्या मिली

    वो मिली भी तो क्या मिली
    बन के बेवफा मिली,
    इतने तो मेरे गुनाह ना थे
    जितनी मुझे सजा मिली।

    कौन कहता है नफ़रतों में

    कौन कहता है नफ़रतों में दर्द है मोहसिन,
    कुछ मोहब्बतें भी बड़ी दर्द नाक होती है।

    कोई रुठे आगर तो उसे फौरन मना लो

    कोई रुठे आगर तो उसे फौरन मना लो
    क्योंकि जिद की जंग मे आक्सर
    जुदाई जीत जाती है बाबु

    वफादार और तुम ?

    वफादार और तुम ?
    ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम?
    इल्जाम भी अच्छा है.

    कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी

    कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
    कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
    बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
    आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी

    नींद चुराने वाले पूछते हैं

    नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यों नही,
    इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यों नही