• Bewafa Shayari

    अल्फाज़ तो बहुत है

    अल्फाज़ तो बहुत है मोहब्बत को जताने के लिए !
    जो मेरी खामुशी नहीं समझ सका
    वो मेरी मोहब्बत क्या समझे गा !!

    वो मिली भी तो क्या मिली

    वो मिली भी तो क्या मिली
    बन के बेवफा मिली,
    इतने तो मेरे गुनाह ना थे
    जितनी मुझे सजा मिली।

    कोई रुठे आगर तो उसे फौरन मना लो

    कोई रुठे आगर तो उसे फौरन मना लो
    क्योंकि जिद की जंग मे आक्सर
    जुदाई जीत जाती है बाबु

    वफादार और तुम ?

    वफादार और तुम ?
    ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम?
    इल्जाम भी अच्छा है.

    मिल ही जाएगा कोई ना कोई

    मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला
    अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता

    हर कोई तेरे आशियाने

    हर कोई तेरे आशियाने
    का पता पूछता है
    न जाने किस किस से
    वफा के वादे किये हैं तूने

    कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी

    कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
    कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
    बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
    आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी

    इबादत रब दी होबे ता चेहरा यार दा होबे

    इबादत रब दी होबे ता चेहरा यार दा होबे
    सजदे खुदा दे ते रस्म प्यार दी होबे
    आशिक़ाँ दे मज़हब दी की दस्सीये,
    ज़िकर रब्ब दा ते गल दिलदार दी होबे

    वो करते हैं शिकायत हमसे कि हम

    वो करते हैं शिकायत हमसे कि हम
    हर किसी को देखकर मुस्कुराते हैं,
    शायद उन्हें नहीं पता कि हमें हर
    मुखड़े में सिर्फ वो ही नज़र आते हैं।

    मुहब्बत साथ हो जरूरी नहीं

    मुहब्बत साथ हो जरूरी नहीं..
    पर मुहब्बत जिन्दगी भर हो ये बहुत जरूरी है