• अब जानेमन तू तो नहीं

    अब जानेमन तू तो नहीं,
    शिकवा-ए-गम किस से कहें
    या चुप हें या रो पड़ें,
    किस्सा-ए-गम किससे कहें।

    दोस्ती ग़म नहीं बल्कि खुशियों की सौगात है
    अगर आए तुम्हे हिचकियाँ
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